आर्य समाज ने कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन चलाकर दी समाज को नई दिशा : आर्यवेश

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युवा आजादी के मूल्यों को समझकर राजनैतिक क्षेत्र में आगे बढ़कर समाज व राष्ट्र को दें नई दिशा।

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली के प्रधान स्वामी आर्यवेश कार्यक्रम को संबोधित करते हुए

  • NTV MEDIA DESK  

  • WRITTEN BY: UMANG  

आर्य समाज क्रांतिकारी व आंदोलनकारियों का संगठन रहा है। चाहे बात आजादी की क्रांति की रही हो, चाहे किसानों के हितों की रही हो। या फिर नारी शिक्षा, पाखंडवाद, शराबबंदी, कन्या भ्रूण हत्या व सती प्रथा सहित सतीप्रथा जैसे कुरीतियों का आर्य समाज ने आंदोलन चलाकर समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया। वर्ष 1971 में गेंहू का मूल्य 76 रुपये प्रति क्विंटल होने के कारण स्वामी इन्द्रवेश की अगुवाई में वोट क्लब दिल्ली में जून के महीने में भूख हडताल की थी। जिससे डरकर भारत सरकार 105 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों की गेंहू की फसल का मूल्य दिया। यह सफलता स्वामी इन्द्रवेश ने आर्य समाज के बैनर तले प्राप्त की।

स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर आयोजित यज्ञ में आहुति देते आर्यगण

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली के प्रधान स्वामी आर्यवेश पलवल की जाट धर्मशाला में आयोजित स्वामी श्रदानंद सरस्वती की प्रथम पुण्यतिथि में कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा की स्वामी जी ने पलवल जिले के किसान आंदोलन, शराबबंदी, मांस की दुकानों और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा संघर्ष किया। उन्होंने आर्य समाज के साथ-साथ राजनैतिक व सामाजिक क्षेत्र में विशेष योगदान दिया।


बडखल विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी विजय प्रताप सिंह ने कहा कि स्वामी श्रदानन्द सरस्वती जैसे संघर्षशील सन्यासी का जाना समाज के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। उनके दिखाए रास्ते पर समाज हमेशा आगे बढ़ता रहे, यही उनको सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।


पूर्व विधायक रघुबीर तेवतिया ने श्रद्धानन्द सरस्वती को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया। उनका जीवन राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर बेदाग छवि वाला रहा।


केंद्रीय आर्य युवक परिषद के प्रधान अनिल आर्य ने कहा कि स्वामी जी ने युवाओं के चरित्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने पिछले 40 वर्षों से युवा चरित्र निर्माण शिविरों का आयोजन करके समाज में अपनी विशेष भूमिका निभाई।


महात्मा वेदपाल आर्य पानीपत ने स्वामी जी को अपने शब्दों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि वह एक ऊर्जावान व उत्साही सन्यासी थे। वे निर्भिक रूप से अपनी बातें समाज सुधार के लिए कहते थे।


श्रीमदयानन्द वेदार्ष महाविद्यालय दिल्ली के संस्थापक व अध्यक्ष और स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती के दीक्षा गुरु स्वामी प्रणवानन्द ने कहा की श्रद्धानंद के जैसे शिष्य को पाकर गर्व का अनुभव होता था। वो हमेशा मेरी आज्ञाओं के पालन के लिए तत्पर रहते थे। इस कार्यक्रम में मंच का कुशल संचालन स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती के उत्तराधिकारी राजदेव आर्य ने किया और कहा कि वो अपने गुरु के बताए मार्ग पर हमेशा चलते रहेगें व उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए तत्पर रहेंगे। कार्यक्रम में सुबह यज्ञ में आर्यजनों ने आहुति प्रदान की।


कार्यक्रम में स्वामी विजयवेश, रघुवीर शास्त्री, जितेंद्र आर्य, मेघराज गुप्ता, हरिओम शास्त्री, सुधीर बंसल, रमेश राणा, विधायक दीपक मंगला, पूर्व विधायक सुभाष चौधरी, बीरपाल दिक्षित, राजेंद्र बैंसला, भरत शर्मा, चंद्रमुनि ब्रह्मानंद, रमेश आर्य, महेश अग्रवाल, यादराम आर्य, राजपाल दहिया, पूर्णसिंह राणा, नारायण आर्य, मदन मोहन आर्य, गजराज आर्य, चंद्रपाल सोनी, लख्मीचंद आर्य, महाशय सतवीर, श्याम सिंह, प्रहलाद सिंह, शिवसिंह आर्य, सत्यपाल आर्य, रणजीत सरपंच, श्रीचन्द महाशय, महेश सरपंच, पार्षद हरकिशन तेवतिया, डॉ. बिजेंद्र आर्य, तेजवीर आर्य, सुनील शास्त्री, रामपाल शास्त्री सहित पलवल जिला के आर्य समाजों के गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। 

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