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| शहीद जवान युधिष्ठिर (फाइल फोटो) |
• NTV MEDIA DESK
• WRITTEN BY : UMANG
सिक्किम में तीन अक्टूबर को बादल फटने से आई बाढ़ में लापता हुए पलवल के गांव खांबी के सैनिक युधिष्ठिर के पार्थिव शरीर को एक माह बाद आज पैतृक गांव लाया गया। युधिष्ठिर जिस गाड़ी में सवार थे, वह गाड़ी सेना को 10 फीट चे मलबे में दबी मिली थी। वहीं, सैनिक का पार्थिव शरीर सेना को एक माह बाद कैंप से एक किलोमीटर दूर मिला था। सैनिक का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की सूचना पर सैकड़ों युवा बाइक पर तिरंगा लगाकर रिसीव करने पहुंचे।
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जहां से भारत माता की जय के नारे लगाते हुए पार्थिव देह को गांव की तरफ लेकर निकले। इस दौरान रास्ते में जो भी गांव पड़ा, वहां के लोगों ने भी खड़े होकर शहीद को अंतिम विदाई दी। पार्थिव देह पैतृक गांव पहुंचते ही पूरा गांव भारत माता के जयघोष से गूंज उठा। कुछ देर में शहीद का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
तीस्ता नदी में बादल फटने से आई थी बाढ़
बता दें कि सिक्किम में तीन अक्टूबर की देर रात बादल फटने से वहां मौजूद तीस्ता नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। बाढ़ का पानी सेना के शिविर में 20 फीट से अधिक आ गया, जिसमें सेना के वाहनों सहित 23 जवानों के अलावा स्थानीय लोग बाढ़ के पानी में बहकर लापता हो गए। सेना के लापता जवानों में खांबी गांव निवासी युधिष्ठिर भी शामिल थे, जो सेना की बटालियन 420 FD में मेडिकल वाहन पर बतौर ड्राइवर तैनात थे।
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| तिरंगा लगे सेना के वाहन में पहुंची गांव खांबी के शहीद युधिष्ठिर का पार्थिव शरीर |
परिजनों ने सेना के जवानों के साथ मिलकर खोजा
लापता जवान युधिष्ठिर के पिता ऋषिदेव उर्फ बिशन ने बताया कि सेना की तरफ से उन्हें उनके लापता बेटे के बारे में जानकारी लेने पर बताया गया। सेना के राहत बचाव दल टीम उसी दिन से सैनिकों को खोजने में लगी थी। तीन दिन पहले शहीद सैनिक के परिजन सिक्किम पहुंच गए थे। सेना के साथ शहीद सैनिक के शव की तलाश शुरू कर दी थी। गुरुवार को शहीद युधिष्ठिर का पार्थिव शव सेना के कैंप से एक किलोमीटर दूर मिला था। जिसको सेना की गाड़ी में शुक्रवार को पलवल जिले के खांबी गांव लाया गया है।









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