प्रदर्शनकारी समूह के प्रवक्ता मनोज नानायकारा ने कहा, "हमने आज सामूहिक रूप से गाले फेस विरोध स्थल को छोड़ने का फैसला किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा संघर्ष समाप्त हो गया है।"
![]() |
| Sri Lanka Crisis - फोटो : ANI |
• कोलंबो
श्रीलंका में तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे के खिलाफ शुरु हुआ आंदोलन 123 दिन बाद मंगलवार को समाप्त हो गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सिस्टम में बदलाव आने तक उनका अभियान जारी रहेगा। बता दें कि श्रीलंका इस समय देश के इतिहास में अभूतपूर्व आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ 9 अप्रैल को प्रदर्शन स्थल गाले फेस पर प्रदर्शन शुरु किया था और 'गोटा गो होम' नारे के साथ इस अभियान को ब्रांड किया था।
प्रदर्शनकारी समूह के प्रवक्ता मनोज नानायकारा ने कहा, "हमने आज सामूहिक रूप से गाले फेस विरोध स्थल को छोड़ने का फैसला किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा संघर्ष समाप्त हो गया है।" एक अन्य कार्यकर्ता विदर्षण कन्नंगारा ने कहा, "हमने विरोध स्थल पर अभियान समाप्त कर दिया है लेकिन सिस्टम में बदलाव आने तक हमारा अभियान जारी रहेगा।"
2014 तक राजपक्षे के कार्यकाल को पूरा करने के लिए संसद द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को चुने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों पर विरोध स्थल छोड़ने का दबाव आया। राष्ट्रपति बनने के बाद विक्रमसिंघे की ओर से सेना और पुलिस को प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया। फिर सेना और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाकर राष्ट्रपति भवन और राजभवन की इमारतों से खाली कराया था।
22 जुलाई को सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति सचिवालय से हटाया। प्रदर्शनकारियों ने 9 अप्रैल के बाद से गेट और राष्ट्रपति सचिवालय पर कब्जा किया हुआ था।
वहीं सरकार ने गिरफ्तारियों का बचाव करते हुए कहा था कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे अदालत के आदेशों की अवहेलना करने वाले थे या जबरन राज्य भवनों में घुसने वाले थे।
पुलिस ने पिछले हफ्ते प्रदर्शनकारियों को 5 अगस्त तक काले फेस को खाली करने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने आदेश की अवहेलना की और विरोध करने के अपने अधिकार का दावा करते हुए न्यायालय में रिट आवेदन दायर किए।हालांकि जब प्रदर्शनकारियों ने गाले फेस छोड़ने की घोषणा कि तो कहा कि उन्होंने अपने रिट आवेदन वापस ले लिए हैं।
पिछले महीने गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर मालदीव और फिर सिंगापुर भाग गए थे। इसके बाद 14 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने उनके आधिकारिक आवास पर धावा बोला था और फिर कई प्रमुख सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया था। इससे पहले उनके भाई महिंदा राजपक्षे ने मई में प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दिया ता और परिवार के चार अन्य सदस्यों ने भी मंत्री पद छोड़ दिया था।
प्रदर्शनकारियों ने राजपक्षे परिवार पर कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के जरिए देश को संकट में डालने का आरोप लगाया। 9 अप्रैल को प्रमुख शहरों में छोटे-छोटे आंदोलन हुए जो बाद में एक जन आंदोलन में बदल गए।




नेशनल टीवी मीडिया पर कमेंट करने वालों का धन्यवाद, हम कोशिश करेंगे की आपकी द्वारा किए गए कमेंट पर ध्यान दे और यदि आपको खबर से संबंधित कोई समस्या है तो उसका भी समाधान करे।