डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने पर घबराएं नहीं। हर मरीज को प्लेटलेट चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। सही जांच, डॉक्टर की सलाह और जागरूकता ही सबसे बड़ा उपचार है।
बरसात के मौसम के साथ देशभर में डेंगू और मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ऐसे समय में लोगों के बीच डेंगू को लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी सामने आती हैं, जिनमें सबसे आम चिंता प्लेटलेट्स काउंट को लेकर होती है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रशांत गुप्ता ने लोगों से अपील की है कि डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने पर घबराने की बजाय सही चिकित्सकीय सलाह का पालन करें।
डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट काउंट का कम होना एक सामान्य लैबोरेटरी फाइंडिंग हो सकती है, लेकिन हर कम प्लेटलेट काउंट का मतलब यह नहीं होता कि मरीज को तुरंत प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता है। अक्सर मरीज और उनके परिजन रिपोर्ट में प्लेटलेट्स की संख्या कम देखकर घबरा जाते हैं और प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की मांग करने लगते हैं, जबकि यह निर्णय केवल रिपोर्ट के एक आंकड़े के आधार पर नहीं लिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर मरीज की संपूर्ण क्लीनिकल स्थिति, रक्तस्राव के लक्षण, प्लेटलेट काउंट के लगातार बदलते स्तर और अन्य जांच रिपोर्टों का मूल्यांकन करने के बाद ही प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता तय करते हैं। विशेष रूप से डेंगू के मामलों में प्लेटलेट काउंट का ट्रेंड कई बार एकल रिपोर्ट से अधिक महत्वपूर्ण होता है।
डॉ. गुप्ता ने आईपीएफ (Immature Platelet Fraction) जांच के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आईपीएफ टेस्ट यह समझने में मदद करता है कि बोन मैरो नए प्लेटलेट्स बनाने के लिए कितना सक्रिय है। यदि शरीर में प्लेटलेट्स तेजी से नष्ट हो रहे हों और बोन मैरो उनकी भरपाई करने का प्रयास कर रहा हो, तो आईपीएफ बढ़ा हुआ दिखाई दे सकता है। वहीं कुछ परिस्थितियों में कम आईपीएफ यह संकेत दे सकता है कि प्लेटलेट उत्पादन पर्याप्त मात्रा में नहीं हो रहा है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आईपीएफ रिपोर्ट के आधार पर भी प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन का निर्णय नहीं लिया जा सकता। प्लेटलेट्स चढ़ाने का फैसला हमेशा मरीज की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सक के आकलन के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डेंगू के दौरान केवल प्लेटलेट्स पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। यदि मरीज को लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी, सांस लेने में परेशानी, रक्तस्राव या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
डॉ. प्रशांत गुप्ता ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इंटरनेट या आसपास के लोगों की सलाह के आधार पर स्वयं कोई निर्णय न लें। समय पर जांच कराएं, प्लेटलेट्स के ट्रेंड को समझें, लक्षणों पर नजर रखें और अपने चिकित्सक की सलाह का पालन करें।
उन्होंने डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए मच्छरों की रोकथाम पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें, साफ-सफाई बनाए रखें तथा मच्छरों से बचाव के सभी उपाय अपनाएं। सही समय पर सही जांच, रिपोर्ट की उचित व्याख्या और आवश्यकता अनुसार उपचार ही मरीज की सुरक्षा का सबसे बेहतर तरीका है।
डॉ. गुप्ता ने अंत में कहा कि डेंगू को लेकर जागरूक रहें, लेकिन घबराएं नहीं। सही जानकारी और समय पर चिकित्सा परामर्श से अधिकांश मरीज सुरक्षित रूप से स्वस्थ हो सकते हैं।




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