आखिर क्या है बौद्ध धर्म...क्यों हुआ बौद्ध धर्म इतना प्रशिद्ध, क्या थे वो सभी कारण जिन्हें आज भी लोग अपनी प्रेरणा मानते है.?? कया है बौद्ध धर्म का इतिहास

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• बौद्ध धर्म की स्थापना •

 • NTV MEDIA DESK

 • BURO REPORT


बौद्ध धर्म की स्थापना...

बौद्ध धर्म की स्थापना गौतम बुद्ध ने की। ईसाई और इस्लाम धर्म के बादबौद्ध धर्म ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म हैं। इस धर्म को मानने  वाले ज्यादातर श्रीलंका, नेपाल, चीन, थाईलैंड, भारत जैसे कई देशों में रहते हैं।


बुद्ध का जन्म 566ई के बीच शाक्य गणराज्य की राजधानी लुंबिनी (नेपाल) में हुआ था। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। इनके पिता का नाम - शुद्धोदन था और शाक्य गण के राजा थे। इनकी माता का नाम महामाया था जो कि सिद्धार्थ को जन्म देने के 7 दिन बाद मर गई थी। सिद्धार्थ को इनकी सौतेली माँ प्रजापती गौतमी ने पाला। गौतम बुद्ध को (गौतम नाम) इनकी सौतेली माँ (प्रजापती गौतमी) से मिला। 


सांसारिक जीवन से दुखी होकर बुद्ध ने 29 वर्ष की आयु में अपना घर  छोड़ सन्यासी जीवन अपना लिया था। जिसे बौद्ध धर्म में महाभिनिष्कमण कहा जाता है।


घर छोड़ने के कारण....


एक बार बौद्ध अपने एक मित्र के साथ कपिलावस्तु की सैर के लिए निकले तो बौद्ध ने चार दृश्य देखें...

1) एक बीमार व्यक्ति

2) एक बूढ़ा व्यक्ति

3) शव

4) एक संयासी


जिन्हें देखने के बाद बौद्ध के दिमाग मे नाना प्रकार के सवाल उठने लगे, की दुनिया मे लोगों के जीवन मे दुःख क्यों है। यह सवाल बौद्ध को दिन-रात परेशान करने लगा, क्योंकि उन्हें इस सवाल का उत्तर चाहिए था,लेकिन इस प्रशन का उत्तर किसी के पास नही था। तो बौद्ध इस प्रशन का उत्तर खोजने के लिए घर छोड़कर चले गए। 


29 वर्ष की आयु में जब बौद्ध घर से निकले तो उसके 7 साल तक वह घर नही आये , एक दिन बौद्ध घूमते-घूमते बनयान पेड़ के नीचे बैठते है और वहीं, बराबर से एक नदी बह रही होती है निरंजना। बोद्ध पेड़ के नीचे बैठकर तपस्या करते है और फिर काफी तपस्या करने के बाद बौद्ध को ज्ञान(निर्वाण) की प्राप्ति हो जाती है। [( ज्ञान को बौद्ध धर्म में निर्वाण कहा गया है)]


★ बौद्ध ने दुनिया में दुःखो के पीछे कुछ कारण बताएं है....


(1) दुनिया मे में दुःख बहुत है...उनका मानना है कि दुनिया अपने दुःख से परेशान नहीं दुसरो के दुःख से काफी ज्यादा परेशान हैं।


(2) इच्छाएं दुनिया मे दुःख का सबसे बड़ा कारण है। लोगों की इच्छाएं ही उनके दुःखो का सबसे बड़ा कारण है,क्योंकि लोगों की एक इच्छा पूरी होती नही की दूसरी इच्छा पहले जाग जाती है उनके अंदर।


(3) बौद्ध ने कहा कि दुनिया मे लोग अपनी इच्छाओं पर काबू पा ले तो उन्हें सभी दुखो से समाधान मिल सकता हैं।


(4) बौद्ध ने इच्छाओ पर काबू पाने के 8-रास्ते बताएं है...


1) सही समाधि

2) सही कार्रवाई

3) सही दृढ़ संकल्प

4) सही भाषण

5) सही आजीविका

6) सही व्यायाम

7) सही स्मृति

8) सही ध्यान


इन 8-रास्तों पर चलके मनुष्य की भव तृष्णा नष्ट हो जाती है।


वहीं, बौद्ध ने निर्वाण प्राप्ति के लिए कुछ सिद्धांत बताए....

(1) अहिंसा 

(2) सत्य के मार्ग पर चलना

(3) चोरी ना करना

(4) किसी भी प्रकार की संपत्ति ना रखना

(5) शराब का सेवन न करना 

(6) झूट नही बोलना

(7) किसी भी गलत काम मे नहीं पड़ना, जैसे धन संचय ना करना...महिलाओं से दूर रहना...नृत्य गान आदि से दूर रहना।


बौद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया। जिसे बौद्ध धर्म मे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। 


बौद्ध की मृत्यु 80 साल की उम्र में कुशीनारा में हुई। जिसे बौद्ध धर्म मे महापरिनिर्वाण कहा गया है। 


बौद्ध की मृत्यु के बाद बौद्ध धर्म दो भागों में विभाजित हो गया:-

1) महायान 

2) हीनयान 


महायान और हीनयान दोनो में लोगों को निर्वाण प्राप्ति करनी थी, लेकीन दोनों में सिर्फ एक ही अंतर था कि

● हीनयान में लोग निर्वाण प्रप्ति खुद करेंगे और

● महायान में लोगों को निर्वाण प्राप्ति कराने में बोद्धिसत्व मदद करेंगे।


बौद्ध धर्म के विभाजित होने के पीछे एक यह कारण भी है कि कुछ लोग बौद्ध को भगवान मानते थे और कुछ लोग बौद्ध को शिक्षक मानते थे।


धन्यवाद....

उम्मीद है आप सभी को बौद्ध के जीवन के बारे में बहुत कुछ पता चला होगा...और गौतमी बौद्ध से आप सभी ने प्रेरणा भी ली होगी।

यदि आपको बौद्ध की जीवन कथा पसंद आई तो हमे कमेंट करके जरूर बताना, और इसी तरह आप जैनिसम के बारे में भी जानना चाहते हो तो कमेंट करके जरूर बताएं।

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