कारगिल युद्ध के दौरान बहादुरी और रण कौशल का अद्भुत उदाहरण पेश करने वाले जांबाजों में सर्वाधिक वीरता के पदक 13वीं जम्मू और कश्मीर राइफल्स और 2 राजपूताना राइफल्स ने हासिल किए थे. इनके अतिरिक्त, 18वीं ग्रेनेडियर, 12वीं जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री, 18 वीं गढ़वाल राइफल्स, 17वीं जाट रेजिमेंट, आर्टिलरी रेजिमेंट, लद्दाख स्काउट्स, 1/11 गोरखा राइफल्स, बिहार रेजिमेंट, 11वीं राजपूताना राइफल्स, 27 वां राजपूत रेजिमेंट, पहली नागा रेजिमेंट, 17 वीं गढ़वाल राइफल्स, 8वीं सिख रेजिमेंट, 8 वीं जाट रेजिमेंट के शूरमाओं ने भी बहादुरी के लिए पदक हासिल किए हैं.
मेरी निगाह में 1999 के कारगिल युद्ध में विजय हासिल करना भारतीय सेना के जांबाजों ने असंभव को संभव करने जैसा था. इस युद्ध में कई ऐसे मौके आए जब भारतीय शूरवीरों ने शौर्य की ऐसी इबारत लिखी, जिसे अब तक न ही देखा गया और न ही सुना गया. वैसे तो इस युद्ध में हर भारतीय सैनिक का युद्ध कौशल अतुलनीय था, फिर भी कुछ ऐसे भी सामने आए, जिनकी वीरता की कहानी सुनने के बाद आज भी मन यही कहता है कि यह कैसे संभव हो सकता हे.
मैं कारगिल… आज आपको ऐसे ही 63 भारतीय शूरवीरों से रूबरू कराने जा रहा हूं, जिन्होंने कारगिल के युद्ध में न केवल वीरता का अविश्मरणीय युद्ध कौशल दिखाया, बल्कि अपने प्राणों की परवाह न करते हुए असंभव को भी संभव कर दिखाया. भारतीय सेना के ये 63 बहादुर सैनिक वह हैं, जिन्हें युद्धोपरांत परमवीर, महावीर और वीर चक्र से सम्मानित किया गया. चलिए, अब आपको उनसे रूबरू कराता हूं और बताता हूं कि उनका संबंध भारतीय सेना की किस यूनिट से है.




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