गुरुवार को भाजपा प्रत्याशी कृष्ण पाल गुर्जर पलवल स्थित भाजपा नेता पूर्व विधायक केहर रावत के पलवल स्थित आवास पर पहुंचे। जहां एक दूसरे नेता ने अपने गिले शिकवे दूर कर पार्टी को मजबूत करने का बचन लिया। विदित रहे की लोकसभा चुनावों में भाजपा की टिकट वितरण के साथ ही भाजपा नेता पूर्व विधायक केहर सिंह रावत ने भाजपा प्रत्याशी व सासंद कृष्ण पाल गुर्जर के खिलाफ खूब जहर उगला था। जहां वह कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री करन दलाल के साथ खड़े दिखाई दिए और अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी कृष्ण पाल गुर्जर खिलाफ खूब जुबानी बाण चलाए।
उधर पूर्व मंत्री करन दलाल का कांग्रेस पार्टी ने टिकट काट दिया और टिकट कटा देख पूर्व विधायक संकट के भवंर में फंस गए। और पिछले सप्ताह ही पूर्व मंत्री हर्ष कुमार ने जजपा छोड़ कर कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र प्रताप को लोकसभा चुनाव में समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही पूर्व विधायक केहर सिंह रावत ने अपने बढे कदम वापस खींच लिए और चुपचाप घर बैठ गए। कहने को तो राजनीति में कब कुछ हो जाऐ इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
लेकिन पूर्व विधायक केहर सिंह रावत ने अपने कदम भाजपा की और वापस खींचने का कारण पूर्व मंत्री हर्ष कुमार के कांग्रेस इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी महेंद्र प्रताप को लोकसभा चुनाव में पहले समर्थन देना बताया जा रहा है। पूर्व विधायक केहर सिंह रावत ने कहा की एक मियान में दो तलवारें नही रह सकती। उन्होंने कहा की वह कांग्रेस इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को वोट देते और उसका श्रेय पूर्व मंत्री हर्ष कुमार लेते। इस लिए उन्होंने अपनी पार्टी प्रत्याशी के साथ रहने में ही भलाई समझी।
अब देखना होगा की केहर सिंह रावत कृष्ण पाल की राजनीति पारी को आगे बढाने में सहयोग करते हैं या फिर केवल उनका एक दूसरे से दूरी मिटाने तक ही यह दोस्ती सीमित रहेगी इसका पता तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा। लेकिन एक बात साफ है भाजपा के कुछ नेताओं को उनकी बात पर यकीन नहीं की वह भाजपा प्रत्याशी को सही मायने में वोट दिलवा पाएंगे। क्योंकि केहर सिंह पर भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने के आरोप पहले भी लगते रहे है।









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